॥ श्रीहरिः ॥
अजामिलोऽप्यथाकर्ण्य दूतानां यमकृष्णयोः।
धर्मं भागवतं शुद्धं त्रैविद्यं च गुणाश्रयम्॥ २४
ajāmilo'pyathākarṇya dūtānāṃ yamakṛṣṇayoḥ|
dharmaṃ bhāgavataṃ śuddhaṃ traividyaṃ ca guṇāśrayam|| 24
अर्थ
इस अवसरपर अजामिलने भगवान्के पार्षदोंसे विशुद्ध भागवत-धर्म और यमदूतोंके मुखसे वेदोक्त सगुण (प्रवृत्तिविषयक) धर्मका श्रवण किया था॥ २४॥✎ 497
अजामिलोऽप्यथाकर्ण्य दूतानां यमकृष्णयोः।
धर्मं भागवतं शुद्धं त्रैविद्यं च गुणाश्रयम्॥ २४
इस अवसरपर अजामिलने भगवान्के पार्षदोंसे विशुद्ध भागवत-धर्म और यमदूतोंके मुखसे वेदोक्त सगुण (प्रवृत्तिविषयक) धर्मका श्रवण किया था॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 709) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/2/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #497 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की