श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.23

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तं विवक्षुमभिप्रेत्य महापुरुषकिङ्कराः।

सहसा पश्यतस्तस्य तत्रान्तर्दधिरेऽनघ॥ २३

taṃ vivakṣumabhipretya mahāpuruṣakiṅkarāḥ|

sahasā paśyatastasya tatrāntardadhire'nagha|| 23

अर्थ

निष्पाप परीक्षित्! भगवान्‌के पार्षदोंने देखा कि अजामिल कुछ कहना चाहता है, तब वे सहसा उसके सामने ही वहीं अन्तर्धान हो गये॥ २३॥✎ 497

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #497 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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