विष्णुदूतोंद्वारा भागवतधर्म-निरूपण और अजामिलका परमधामगमन
श्रीशुक उवाच
एवं ते भगवद्दूता यमदूताभिभाषितम्।
उपधार्याथ तान् राजन् प्रत्याहुर्नयकोविदाः॥ १
evaṃ te bhagavaddūtā yamadūtābhibhāṣitam|
upadhāryātha tān rājan pratyāhurnayakovidāḥ|| 1
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान्के नीतिनिपुण एवं धर्मका मर्म जाननेवाले पार्षदोंने यमदूतोंका यह अभिभाषण सुनकर उनसे इस प्रकार कहा॥ १॥
एवं ते भगवद्दूता यमदूताभिभाषितम्।
उपधार्याथ तान् राजन् प्रत्याहुर्नयकोविदाः॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान्के नीतिनिपुण एवं धर्मका मर्म जाननेवाले पार्षदोंने यमदूतोंका यह अभिभाषण सुनकर उनसे इस प्रकार कहा॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 703) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/2/1/