(इस प्रकार प्रार्थना करे—) ‘प्रभो! आप पूर्णकाम हैं। अतएव आपको किसीसे भी कुछ लेना-देना नहीं है। आप समस्त विभूतियोंके स्वामी और सकल-सिद्धिस्वरूप हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करती हूँ॥ ४॥✎ 556
अलं ते निरपेक्षाय पूर्णकाम नमोऽस्तु ते।
महाविभूतिपतये नमः सकलसिद्धये॥ ४
(इस प्रकार प्रार्थना करे—) ‘प्रभो! आप पूर्णकाम हैं। अतएव आपको किसीसे भी कुछ लेना-देना नहीं है। आप समस्त विभूतियोंके स्वामी और सकल-सिद्धिस्वरूप हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करती हूँ॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.19.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 801) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/19/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)