श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.19.4

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

अलं ते निरपेक्षाय पूर्णकाम नमोऽस्तु ते।

महाविभूतिपतये नमः सकलसिद्धये॥ ४

alaṃ te nirapekṣāya pūrṇakāma namo'stu te|

mahāvibhūtipataye namaḥ sakalasiddhaye|| 4

अर्थ

(इस प्रकार प्रार्थना करे—) ‘प्रभो! आप पूर्णकाम हैं। अतएव आपको किसीसे भी कुछ लेना-देना नहीं है। आप समस्त विभूतियोंके स्वामी और सकल-सिद्धिस्वरूप हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करती हूँ॥ ४॥✎ 556

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #556 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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