श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.19.3

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

निशम्य मरुतां जन्म ब्राह्मणाननुमन्त्र्य च।

स्नात्वा शुक्लदती शुक्ले वसीतालङ्कृताम्बरे।

पूजयेत्प्रातराशात्प्राग्भगवन्तं श्रिया सह॥ ३

niśamya marutāṃ janma brāhmaṇānanumantrya ca|

snātvā śukladatī śukle vasītālaṅkṛtāmbare|

pūjayetprātarāśātprāgbhagavantaṃ śriyā saha|| 3

अर्थ

पहले मरुद्गणके जन्मकी कथा सुनकर ब्राह्मणोंसे आज्ञा ले। फिर प्रतिदिन सबेरे दाँतुन आदिसे दाँत साफ करके स्नान करे, दो श्वेत वस्त्र धारण करे और आभूषण भी पहन ले। प्रातःकाल कुछ भी खानेसे पहले ही भगवान् लक्ष्मी-नारायणकी पूजा करे॥ ३॥✎ 556

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #556 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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