श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.19.24

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

आचार्यमग्रतः कृत्वा वाग्यतः सह बन्धुभिः।

दद्यात्पत्न्यै चरोः शेषं सुप्रजस्त्वं सुसौभगम्॥ २४

ācāryamagrataḥ kṛtvā vāgyataḥ saha bandhubhiḥ|

dadyātpatnyai caroḥ śeṣaṃ suprajastvaṃ susaubhagam|| 24

अर्थ

पहले आचार्यको भोजन कराये, फिर मौन होकर भाई-बन्धुओंके साथ स्वयं भोजन करे। इसके बाद हवनसे बची हुई घृतमिश्रित खीर अपनी पत्नीको दे। वह प्रसाद स्त्रीको सत्पुत्र और सौभाग्य दान करनेवाला होता है॥ २४॥

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