श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.19.23

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

आशिषः शिरसाऽऽदाय द्विजैः प्रीतैः समीरिताः।

प्रणम्य शिरसा भक्‍त्या भुञ्जीत तदनुज्ञया॥ २३

āśiṣaḥ śirasā''dāya dvijaiḥ prītaiḥ samīritāḥ|

praṇamya śirasā bhaktyā bhuñjīta tadanujñayā|| 23

अर्थ

इसके बाद जब ब्राह्मण प्रसन्‍न होकर उसे आशीर्वाद दें, तो बड़े आदरसे सिर झुकाकर उन्हें स्वीकार करे। भक्तिभावसे माथा टेककर उनके चरणोंमें प्रणाम करे और उनकी आज्ञा लेकर भोजन करे॥ २३॥

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