श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.65

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

न ममार दितेर्गर्भः श्रीनिवासानुकम्पया।

बहुधा कुलिशक्षुण्णो द्रौण्यस्त्रेण यथा भवान्॥ ६५

na mamāra ditergarbhaḥ śrīnivāsānukampayā|

bahudhā kuliśakṣuṇṇo drauṇyastreṇa yathā bhavān|| 65

अर्थ

परीक्षित्! जैसे अश्‍वत्थामाके ब्रह्मास्त्रसे तुम्हारा कुछ भी अनिष्ट नहीं हुआ, वैसे ही भगवान् श्रीहरिकी कृपासे दितिका वह गर्भ वज्रके द्वारा टुकड़े-टुकड़े होनेपर भी मरा नहीं॥ ६५॥✎ 553

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #553 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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