महायोगी वाल्मीकिजी भी वरुणके पुत्र थे। वल्मीकसे पैदा होनेके कारण ही उनका नाम वाल्मीकि पड़ गया था। उर्वशीको देखकर मित्र और वरुण दोनोंका वीर्य स्खलित हो गया था। उसे उन लोगोंने घड़ेमें रख दिया। उसीसे मुनिवर अगस्त्य और वसिष्ठजीका जन्म हुआ। मित्रकी पत्नी थी रेवती। उसके तीन पुत्र हुए—उत्सर्ग, अरिष्ट और पिप्पल ॥ ५-६॥
यह अर्थ श्लोक 5–6 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
वाल्मीकिश्च महायोगी वल्मीकादभवत्किल।
अगस्त्यश्च वसिष्ठश्च मित्रावरुणयोर्ऋषी॥ ५
महायोगी वाल्मीकिजी भी वरुणके पुत्र थे। वल्मीकसे पैदा होनेके कारण ही उनका नाम वाल्मीकि पड़ गया था। उर्वशीको देखकर मित्र और वरुण दोनोंका वीर्य स्खलित हो गया था। उसे उन लोगोंने घड़ेमें रख दिया। उसीसे मुनिवर अगस्त्य और वसिष्ठजीका जन्म हुआ। मित्रकी पत्नी थी रेवती। उसके तीन पुत्र हुए—उत्सर्ग, अरिष्ट और पिप्पल ॥ ५-६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 792) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/18/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1096 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): मित्रावरुणयोऋर्षी॥ → मित्रावरुणयोऋर्ऋषी॥
#1097 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): मित्रावरुणयोऋर्ऋषी॥ → मित्रावरुणयोर्ऋषी॥