श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.33

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

पतिरेव हि नारीणां दैवतं परमं स्मृतम्।

मानसः सर्वभूतानां वासुदेवः श्रियः पतिः॥ ३३

patireva hi nārīṇāṃ daivataṃ paramaṃ smṛtam|

mānasaḥ sarvabhūtānāṃ vāsudevaḥ śriyaḥ patiḥ|| 33

अर्थ

शास्त्रोंमें यह बात स्पष्ट कही गयी है कि पति ही स्त्रियोंका परमाराध्य इष्टदेव है। प्रिये! लक्ष्मीपति भगवान् वासुदेव ही समस्त प्राणियोंके हृदयमें विराजमान हैं॥ ३३॥

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