श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.1

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

अथाष्टादशोऽध्यायः

अदिति और दितिकी सन्तानोंकी तथा मरुद्गणोंकी उत्पत्तिका वर्णन

श्रीशुक उवाच

पृश्निस्तु पत्‍नी सवितुः सावित्रीं व्याहृतिं त्रयीम्।

अग्‍निहोत्रं पशुं सोमं चातुर्मास्यं महामखान्॥ १

pṛśnistu patnī savituḥ sāvitrīṃ vyāhṛtiṃ trayīm|

agnihotraṃ paśuṃ somaṃ cāturmāsyaṃ mahāmakhān|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! सविताकी पत्‍नी पृश्निके गर्भसे आठ सन्तानें हुईं—सावित्री, व्याहृति, त्रयी, अग्‍निहोत्र, पशु, सोम, चातुर्मास्य और पंचमहायज्ञ॥ १॥

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