oṃ namo bhagavate mahāpuruṣāya mahānubhāvāya mahāvibhūtipataye sakalasātvataparivṛḍhanikarakarakamalakuḍmalopalālitacaraṇāravindayugala parama parameṣṭhinnamaste|| 25||
अर्थ
ॐकारस्वरूप महाप्रभावशाली महाविभूतिपति भगवान् महापुरुषको नमस्कार है। श्रेष्ठ भक्तोंका समुदाय अपने करकमलोंकी कलियोंसे आपके युगल चरणकमलोंकी सेवामें संलग्न रहता है। प्रभो! आप ही सर्वश्रेष्ठ हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ’॥ २५॥
ॐ नमो भगवते महापुरुषाय महानुभावाय महाविभूतिपतये सकलसात्वतपरिवृढनिकरकरकमलकुड्मलोपलालितचरणारविन्दयुगल परम परमेष्ठिन्नमस्ते॥ २५॥
ॐकारस्वरूप महाप्रभावशाली महाविभूतिपति भगवान् महापुरुषको नमस्कार है। श्रेष्ठ भक्तोंका समुदाय अपने करकमलोंकी कलियोंसे आपके युगल चरणकमलोंकी सेवामें संलग्न रहता है। प्रभो! आप ही सर्वश्रेष्ठ हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ’॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.16.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 781) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/16/25/