श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.16.11

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

नादत्त आत्मा हि गुणं न दोषं न क्रियाफलम्।

उदासीनवदासीनः परावरदृगीश्‍वरः॥ ११

nādatta ātmā hi guṇaṃ na doṣaṃ na kriyāphalam|

udāsīnavadāsīnaḥ parāvaradṛgīśvaraḥ|| 11

अर्थ

यह आत्मा कार्य-कारणका साक्षी और स्वतन्त्र है। इसलिये यह शरीर आदिके गुण-दोष अथवा कर्मफलको ग्रहण नहीं करता, सदा उदासीनभावसे स्थित रहता है॥ ११॥

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