बुद्धिमती रानीने यह देखकर कि बच्चा बहुत देरसे सो रहा है, धायसे कहा—‘कल्याणि! मेरे लालको ले आ’॥ ४५॥✎ 540
शयानं सुचिरं बालमुपधार्य मनीषिणी।
पुत्रमानय मे भद्रे इति धात्रीमचोदयत्॥ ४५
बुद्धिमती रानीने यह देखकर कि बच्चा बहुत देरसे सो रहा है, धायसे कहा—‘कल्याणि! मेरे लालको ले आ’॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 772) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/14/45/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)