श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.12.34

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तदा च खे दुन्दुभयो विनेदु-

र्गन्धर्वसिद्धाः समहर्षिसङ्घाः।

वार्त्रघ्नलिङ्गैस्तमभिष्टुवाना

मन्त्रैर्मुदा कुसुमैरभ्यवर्षन्॥ ३४

tadā ca khe dundubhayo vinedu-

rgandharvasiddhāḥ samaharṣisaṅghāḥ|

vārtraghnaliṅgaistamabhiṣṭuvānā

mantrairmudā kusumairabhyavarṣan|| 34

अर्थ

उस समय आकाशमें दुन्दुभियाँ बजने लगीं। महर्षियोंके साथ गन्धर्व, सिद्ध आदि वृत्रघाती इन्द्रका पराक्रम सूचित करनेवाले मन्त्रोंसे उनकी स्तुति करके बड़े आनन्दके साथ उनपर पुष्पोंकी वर्षा करने लगे॥ ३४॥

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