॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.12.14
तस्मादकीर्तियशसोर्जयापजययोरपि ।
समः स्यात् सुखदुःखाभ्यां मृत्युजीवितयोस्तथा॥ १४
tasmādakīrtiyaśasorjayāpajayayorapi |
samaḥ syāt sukhaduḥkhābhyāṃ mṛtyujīvitayostathā|| 14
अर्थ
इसलिये यश-अपयश, जय-पराजय, सुख-दुःख, जीवन-मरण—इनमेंसे किसी एककी इच्छा-अनिच्छा न रखकर सभी परिस्थितियोंमें समभावसे रहना चाहिये—हर्ष-शोकके वशीभूत नहीं होना चाहिये॥ १४॥