श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.12.13

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

आयुः श्रीः कीर्तिरैश्‍वर्यमाशिषः पुरुषस्य याः।

भवन्त्येव हि तत्काले यथानिच्छोर्विपर्ययाः॥ १३

āyuḥ śrīḥ kīrtiraiśvaryamāśiṣaḥ puruṣasya yāḥ|

bhavantyeva hi tatkāle yathānicchorviparyayāḥ|| 13

अर्थ

जिस प्रकार इच्छा न होनेपर भी समय विपरीत होनेसे मनुष्यको मृत्यु और अपयश आदि प्राप्त होते हैं—वैसे ही समयकी अनुकूलता होनेपर इच्छा न होनेपर भी उसे आयु, लक्ष्मी, यश और ऐश्‍वर्य आदि भोग भी मिल जाते हैं॥ १३॥

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