श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.11.17

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

अन्येऽनु ये त्वेह नृशंसमज्ञा

ये ह्युद्यतास्त्राः प्रहरन्ति मह्यम्।

तैर्भूतनाथान् सगणान् निशात-

त्रिशूलनिर्भिन्‍नगलैर्यजामि ॥ १७

anye'nu ye tveha nṛśaṃsamajñā

ye hyudyatāstrāḥ praharanti mahyam|

tairbhūtanāthān sagaṇān niśāta-

triśūlanirbhinnagalairyajāmi || 17

अर्थ

ये अज्ञानी देवता तेरे-जैसे नीच और क्रूरके अनुयायी बनकर मुझपर शस्त्रोंसे प्रहार कर रहे हैं। मैं अपने तीखे त्रिशूलसे उनकी गरदन काट डालूँगा और उनके द्वारा गणोंके सहित भैरवादि भूतनाथोंको बलि चढ़ाऊँगा॥ १७॥

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