एक दिन यह ब्राह्मण अपने पिताके आदेशानुसार वनमें गया और वहाँसे फल-फूल, समिधा तथा कुश लेकर घरके लिये लौटा॥ ५८॥
एकदासौ वनं यातः पितृसन्देशकृद् द्विजः।
आदाय तत आवृत्तः फलपुष्पसमित्कुशान्॥ ५८
एक दिन यह ब्राह्मण अपने पिताके आदेशानुसार वनमें गया और वहाँसे फल-फूल, समिधा तथा कुश लेकर घरके लिये लौटा॥ ५८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.1.58 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 702) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/1/58/