श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.4

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

प्रियव्रतोत्तानपदोर्वंशस्तच्चरितानि च।

द्वीपवर्षसमुद्राद्रिनद्युद्यानवनस्पतीन् ॥ ४

priyavratottānapadorvaṃśastaccaritāni ca|

dvīpavarṣasamudrādrinadyudyānavanaspatīn || 4

अर्थ

साथ ही (चौथे और पाँचवें स्कन्धमें) प्रियव्रत और उत्तानपादके वंशों तथा चरित्रोंका एवं द्वीप, वर्ष, समुद्र, पर्वत, नदी, उद्यान और विभिन्‍न द्वीपोंके वृक्षोंका भी निरूपण किया॥ ४॥

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