जगत्में यह भक्तिका पंथ ही सर्वश्रेष्ठ, भयरहित और कल्याणस्वरूप है; क्योंकि इस मार्गपर भगवत्परायण, सुशील साधुजन चलते हैं॥ १७॥✎ 494
सध्रीचीनो ह्ययं लोके पन्थाः क्षेमोऽकुतोभयः।
सुशीलाः साधवो यत्र नारायणपरायणाः॥ १७
जगत्में यह भक्तिका पंथ ही सर्वश्रेष्ठ, भयरहित और कल्याणस्वरूप है; क्योंकि इस मार्गपर भगवत्परायण, सुशील साधुजन चलते हैं॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.1.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 697) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/1/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)