श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.4.6

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

यस्य३ ह पाण्डवेय श्लोकावुदाहरन्ति—

को४ नु तत्कर्म राजर्षेर्नाभेरन्वाचरेत्पुमान्।

अपत्यतामगाद्यस्य हरिः शुद्धेन कर्मणा॥ ६

yasya ha pāṇḍaveya ślokāvudāharanti—

ko nu tatkarma rājarṣernābheranvācaretpumān|

apatyatāmagādyasya hariḥ śuddhena karmaṇā|| 6

अर्थ

पाण्डुनन्दन! राजा नाभिके विषयमें यह लोकोक्ति प्रसिद्ध है—✎ 439

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—यत्र।

    (मुद्रित पृष्ठ 591)
  2. ४

    प्रा० पा०—कस्तत्कर्म।

    (मुद्रित पृष्ठ 591)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #439 शब्दोंके बीचका स्थान: लोकोक्तिप्रसिद्ध → लोकोक्ति प्रसिद्ध

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