श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.3.9

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तद्यथा बालिशानां स्वयमात्मनः श्रेयः परमविदुषां परमपरमपुरुष प्रकर्षकरुणया स्वमहिमानं चापवर्गाख्यमुपकल्पयिष्यन् स्वयं नापचित एवेतरवदिहोपलक्षितः॥ ९॥ अथायमेव वरो ह्यर्हत्तम यर्हि बर्हिषि राजर्षेर्वरदर्षभो भवान्‍निजपुरुषेक्षणविषय आसीत्॥ १०॥✎ 929 1046

tadyathā bāliśānāṃ svayamātmanaḥ śreyaḥ paramaviduṣāṃ paramaparamapuruṣa prakarṣakaruṇayā svamahimānaṃ cāpavargākhyamupakalpayiṣyan svayaṃ nāpacita evetaravadihopalakṣitaḥ|| 9||

अर्थ

आप ब्रह्मादि परम पुरुषोंकी अपेक्षा भी परम श्रेष्ठ हैं। हम तो यह भी नहीं जानते कि हमारा परम कल्याण किसमें है, और न हमसे आपकी यथोचित पूजा ही बनी है; तथापि जिस प्रकार तत्त्वज्ञ पुरुष बिना बुलाये भी केवल करुणावश अज्ञानी पुरुषोंके पास चले जाते हैं, उसी प्रकार आप भी हमें मोक्षसंज्ञक अपना परमपद और हमारी अभीष्ट वस्तुएँ प्रदान करनेके लिये अन्य साधारण यज्ञदर्शकोंके समान यहाँ प्रकट हुए हैं॥ ९॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #929 शब्दोंके बीचका स्थान: एवेतरवदिहोपलक्षित:॥९॥ → एवेतरवदिहोपलक्षितः॥ ९॥
  • #1046 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हृार्हत्तम → ह्यर्हत्तम

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