इस प्रकार नौ वर्षमें प्रतिवर्ष एकके क्रमसे नौ पुत्र उत्पन्न कर पूर्वचित्ति उन्हें राजभवनमें ही छोड़कर फिर ब्रह्माजीकी सेवामें उपस्थित हो गयी॥ २०॥
सा सूत्वाथ सुतान्नवानुवत्सरं गृह एवापहाय पूर्वचित्तिर्भूय एवाजं देवमुपतस्थे॥ २०॥
इस प्रकार नौ वर्षमें प्रतिवर्ष एकके क्रमसे नौ पुत्र उत्पन्न कर पूर्वचित्ति उन्हें राजभवनमें ही छोड़कर फिर ब्रह्माजीकी सेवामें उपस्थित हो गयी॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.2.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 586) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/2/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1045 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): मेरुदुहितृर्मेरुदेवीं → मेरुदुहितॄर्मेरुदेवीं