श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.19.3

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

ॐ नमो भगवते उत्तमश्लोकाय नम आर्यलक्षणशीलव्रताय नम उपशिक्षितात्मन उपासितलोकाय नमः साधुवादनिकषणाय१ नमो ब्रह्मण्यदेवाय महापुरुषाय महाराजाय नम इति॥ ३॥

oṃ namo bhagavate uttamaślokāya nama āryalakṣaṇaśīlavratāya nama upaśikṣitātmana upāsitalokāya namaḥ sādhuvādanikaṣaṇāya namo brahmaṇyadevāya mahāpuruṣāya mahārājāya nama iti|| 3||

अर्थ

‘हम ॐकारस्वरूप पवित्रकीर्ति भगवान् श्रीरामको नमस्कार करते हैं। आपमें सत्पुरुषोंके लक्षण, शील और आचरण विद्यमान हैं; आप बड़े ही संयतचित्त, लोकाराधनतत्पर, साधुताकी परीक्षाके लिये कसौटीके समान और अत्यन्त ब्राह्मणभक्त हैं। ऐसे महापुरुष महाराज रामको हमारा पुनः-पुनः प्रणाम है’॥ ३॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—वादधिषणाय।

    (मुद्रित पृष्ठ 656)

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