श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.1.33

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

क्षारोदेक्षुरसोदसुरोदघृतोदक्षीरोददधिमण्डोदशुद्धोदाः सप्त जलधयः सप्त द्वीपपरिखा१ इवाभ्यन्तरद्वीपसमाना एकैकश्येन२ यथानुपूर्वं सप्तस्वपि बहिर्द्वीपेषु पृथक्परित३ उपकल्पितास्तेषु४ जम्ब्वादिषु बर्हिष्मतीपतिरनुव्रतानात्मजानाग्नीध्रेध्मजिह्वयज्ञबाहु५हिरण्यरेतोघृतपृष्ठमेधातिथिवीतिहोत्रसंज्ञान् ६यथासंख्येन एकैकस्मिन् एकमेवाधिपतिं विदधे॥ ३३॥ दुहितरं चोर्जस्वतीं नामोशनसे प्रायच्छद्यस्यामासीद् देवयानी नाम काव्यसुता॥ ३४॥

kṣārodekṣurasodasurodaghṛtodakṣīrodadadhimaṇḍodaśuddhodāḥ sapta jaladhayaḥ sapta dvīpaparikhā ivābhyantaradvīpasamānā ekaikaśyena yathānupūrvaṃ saptasvapi bahirdvīpeṣu pṛthakparita upakalpitāsteṣu jambvādiṣu barhiṣmatīpatiranuvratānātmajānāgnīdhredhmajihvayajñabāhuhiraṇyaretoghṛtapṛṣṭhamedhātithivītihotrasaṃjñān yathāsaṃkhyena ekaikasmin ekamevādhipatiṃ vidadhe|| 33||

अर्थ

सात समुद्र क्रमशः खारे जल, ईखके रस, मदिरा, घी, दूध, मट्ठे और मीठे जलसे भरे हुए हैं। ये सातों द्वीपोंकी खाइयोंके समान हैं और परिमाणमें अपने भीतरवाले द्वीपके बराबर हैं। इनमेंसे एक-एक क्रमशः अलग-अलग सातों द्वीपोंको बाहरसे घेरकर स्थित हैं।* बर्हिष्मतीपति महाराज प्रियव्रतने अपने अनुगत पुत्र आग्नीध्र, इध्मजिह्व, यज्ञबाहु, हिरण्यरेता, घृतपृष्ठ, मेधातिथि और वीतिहोत्रमेंसे क्रमशः एक-एकको उक्त जम्बू आदि द्वीपोंमेंसे एक-एकका राजा बनाया॥ ३३॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—द्वीपशिखाभ्यन्तरे द्वीप०।

    (मुद्रित पृष्ठ 581)
  2. २

    प्रा० पा०—एकैकस्येव।

    (मुद्रित पृष्ठ 581)
  3. ३

    प्रा० पा०—पृथक् परिधय उपकल्पिता०।

    (मुद्रित पृष्ठ 581)
  4. ४

    प्रा० पा०—तेषु बर्हिष्मतीपति०।

    (मुद्रित पृष्ठ 581)
  5. ५

    प्रा० पा०—वाह०।

    (मुद्रित पृष्ठ 581)
  6. ६

    प्रा० पा०—यथासंख्यकमेकैकस्मिन्‍नेकमेवाधि०।

    (मुद्रित पृष्ठ 581)
  7. *

    इनका क्रम इस प्रकार समझना चाहिये—पहले जम्बूद्वीप है, उसके चारों ओर क्षार समुद्र है। वह प्लक्षद्वीपसे घिरा हुआ है, उसके चारों ओर ईखके रसका समुद्र है। उसे शाल्मलिद्वीप घेरे हुए है, उसके चारों ओर मदिराका समुद्र है। फिर कुशद्वीप है, वह घीके समुद्रसे घिरा हुआ है। उसके बाहर क्रौंचद्वीप है, उसके चारों ओर दूधका समुद्र है। फिर शाकद्वीप है, उसे मट्ठेका समुद्र घेरे हुए है। उसके चारों ओर पुष्करद्वीप है, वह मीठे जलके समुद्रसे घिरा हुआ है।

    (मुद्रित पृष्ठ 581)

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