॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 5.1.32
जम्बूप्लक्षशाल्मलिकुशक्रौञ्चशाकपुष्करसंज्ञास्तेषां परिमाणं पूर्वस्मात्पूर्वस्मादुत्तर उत्तरो यथासंख्यं द्विगुणमानेन६ बहिः समन्तत उपक्लृप्ताः ॥ ३२॥
jambūplakṣaśālmalikuśakrauñcaśākapuṣkarasaṃjñāsteṣāṃ parimāṇaṃ pūrvasmātpūrvasmāduttara uttaro yathāsaṃkhyaṃ dviguṇamānena bahiḥ samantata upaklṛptāḥ || 32||
अर्थ
उनके नाम क्रमशः जम्बू, प्लक्ष, शाल्मलि, कुश, क्रौंच, शाक और पुष्कर द्वीप हैं। इनमेंसे पहले-पहलेकी अपेक्षा आगे-आगेके द्वीपका परिमाण दूना है और ये समुद्रके बाहरी भागमें पृथ्वीके चारों ओर फैले हुए हैं॥ ३२॥
टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—द्विगुणेन बहिः समन्ततः।