श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.66

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

वीक्ष्योढवयसं तं च प्रकृतीनां च सम्मतम्।

अनुरक्तप्रजं राजा ध्रुवं चक्रे भुवः पतिम्॥ ६६

vīkṣyoḍhavayasaṃ taṃ ca prakṛtīnāṃ ca sammatam|

anuraktaprajaṃ rājā dhruvaṃ cakre bhuvaḥ patim|| 66

अर्थ

फिर यह देखकर कि अब ध्रुव तरुण अवस्थाको प्राप्त हो गये हैं, अमात्यवर्ग उन्हें आदरकी दृष्टिसे देखते हैं तथा प्रजाका भी उनपर अनुराग है, उन्होंने उन्हें निखिल भूमण्डलके राज्यपर अभिषिक्त कर दिया॥ ६६॥

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