श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.65

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

उत्तानपादो राजर्षिः प्रभावं तनयस्य तम्।

श्रुत्वा दृष्ट्वाद्भुततमं प्रपेदे विस्मयं परम्॥ ६५

uttānapādo rājarṣiḥ prabhāvaṃ tanayasya tam|

śrutvā dṛṣṭvādbhutatamaṃ prapede vismayaṃ param|| 65

अर्थ

राजर्षि उत्तानपादने अपने पुत्रके अति अद्भुत प्रभावकी बात देवर्षि नारदसे पहले ही सुन रखी थी; अब उसे प्रत्यक्ष वैसा ही देखकर उन्हें बड़ा आश्‍चर्य हुआ॥ ६५॥

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