॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.9.39
सदश्वं रथमारुह्य कार्तस्वरपरिष्कृतम्।
ब्राह्मणैः कुलवृद्धैश्च पर्यस्तोऽमात्यबन्धुभिः॥ ३९
sadaśvaṃ rathamāruhya kārtasvarapariṣkṛtam|
brāhmaṇaiḥ kulavṛddhaiśca paryasto'mātyabandhubhiḥ|| 39
अर्थ
राजा उत्तानपादने पुत्रका मुख देखनेके लिये उत्सुक होकर बहुत-से ब्राह्मण, कुलके बड़े-बूढ़े, मन्त्री और बन्धुजनोंको साथ लिया तथा एक बढ़िया घोड़ोंवाले सुवर्णजटित रथपर सवार होकर वे झटपट नगरके बाहर आये। उनके आगे-आगे वेदध्वनि होती जाती थी तथा शंख, दुन्दुभि एवं वंशी आदि अनेकों मांगलिक बाजे बजते जाते थे॥ ३९-४०॥✎ 1946