श्रीभगवान्ने कहा—उत्तम व्रतका पालन करनेवाले राजकुमार! मैं तेरे हृदयका संकल्प जानता हूँ। यद्यपि उस पदका प्राप्त होना बहुत कठिन है, तो भी मैं तुझे वह देता हूँ। तेरा कल्याण हो॥ १९॥✎ 376
वेदाहं ते व्यवसितं हृदि राजन्यबालक।
तत्प्रयच्छामि भद्रं ते दुरापमपि सुव्रत॥ १९
श्रीभगवान्ने कहा—उत्तम व्रतका पालन करनेवाले राजकुमार! मैं तेरे हृदयका संकल्प जानता हूँ। यद्यपि उस पदका प्राप्त होना बहुत कठिन है, तो भी मैं तुझे वह देता हूँ। तेरा कल्याण हो॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.9.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 455) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/9/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#376 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने