श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.65

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

राजोवाच

सुतो मे बालको ब्रह्मन् स्त्रैणेनाकरुणात्मना।

निर्वासितः पंचवर्षः सह मात्रा महान्कविः॥ ६५

suto me bālako brahman straiṇenākaruṇātmanā|

nirvāsitaḥ paṃcavarṣaḥ saha mātrā mahānkaviḥ|| 65

अर्थ

राजाने कहा—ब्रह्मन्! मैं बड़ा ही स्त्रैण और निर्दय हूँ। हाय, मैंने अपने पाँच वर्षके नन्हेसे बच्चेको उसकी माताके साथ घरसे निकाल दिया। मुनिवर! वह बड़ा ही बुद्धिमान् था॥ ६५॥

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