kiṃ vā na riṣyate kāmo dharmo vārthena saṃyutaḥ|| 64
अर्थ
श्रीनारदजीने कहा—राजन्! तुम्हारा मुख सूखा हुआ है, तुम बड़ी देरसे किस सोच-विचारमें पड़े हो? तुम्हारे धर्म, अर्थ और काममेंसे किसीमें कोई कमी तो नहीं आ गयी?॥ ६४॥
राजन् किं ध्यायसे दीर्घं मुखेन परिशुष्यता।
किं वा न रिष्यते कामो धर्मो वार्थेन संयुतः॥ ६४
श्रीनारदजीने कहा—राजन्! तुम्हारा मुख सूखा हुआ है, तुम बड़ी देरसे किस सोच-विचारमें पड़े हो? तुम्हारे धर्म, अर्थ और काममेंसे किसीमें कोई कमी तो नहीं आ गयी?॥ ६४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.64 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 449) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/8/64/