श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.7.59

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

तमेव दयितं भूय आवृङ्क्ते पतिमम्बिका।

अनन्यभावैकगतिं शक्तिः सुप्तेव पूरुषम्॥ ५९

tameva dayitaṃ bhūya āvṛṅkte patimambikā|

ananyabhāvaikagatiṃ śaktiḥ supteva pūruṣam|| 59

अर्थ

जिस प्रकार प्रलयकालमें लीन हुई शक्ति सृष्टिके आरम्भमें फिर ईश्‍वरका ही आश्रय लेती है, उसी प्रकार अनन्यपरायणा श्रीअम्बिकाजीने उस जन्ममें भी अपने एकमात्र आश्रय और प्रियतम भगवान् शंकरको ही वरण किया॥ ५९॥

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