विदुरजी! सुना है कि दक्षसुता सतीजीने इस प्रकार अपना पूर्वशरीर त्यागकर फिर हिमालयकी पत्नी मेनाके गर्भसे जन्म लिया था॥ ५८॥
एवं दाक्षायणी हित्वा सती पूर्वकलेवरम्।
जज्ञे हिमवतः क्षेत्रे मेनायामिति शुश्रुम॥ ५८
विदुरजी! सुना है कि दक्षसुता सतीजीने इस प्रकार अपना पूर्वशरीर त्यागकर फिर हिमालयकी पत्नी मेनाके गर्भसे जन्म लिया था॥ ५८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.7.58 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 442) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/7/58/