श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.7.54

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

त्रयाणामेकभावानां यो न पश्यति वै भिदाम्।

सर्वभूतात्मनां ब्रह्मन् स शान्तिमधिगच्छति॥ ५४

trayāṇāmekabhāvānāṃ yo na paśyati vai bhidām|

sarvabhūtātmanāṃ brahman sa śāntimadhigacchati|| 54

अर्थ

ब्रह्मन्! हम—ब्रह्मा, विष्णु और महेश्‍वर—तीनों स्वरूपतः एक ही हैं और हम ही सम्पूर्ण जीवरूप हैं; अतः जो हममें कुछ भी भेद नहीं देखता, वही शान्ति प्राप्त करता है॥ ५४॥

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