श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.7.16

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

क्षमाप्यैवं स मीढ्वांसं ब्रह्मणा चानुमन्त्रितः।

कर्म सन्तानयामास सोपाध्यायर्त्विगादिभिः॥ १६

kṣamāpyaivaṃ sa mīḍhvāṃsaṃ brahmaṇā cānumantritaḥ|

karma santānayāmāsa sopādhyāyartvigādibhiḥ|| 16

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—आशुतोष शंकरसे इस प्रकार अपना अपराध क्षमा कराकर दक्षने ब्रह्माजीके कहनेपर उपाध्याय, ऋत्विज् आदिकी सहायतासे यज्ञकार्य आरम्भ किया॥ १६॥✎ 362

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #362 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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