kṣamāpyaivaṃ sa mīḍhvāṃsaṃ brahmaṇā cānumantritaḥ|
karma santānayāmāsa sopādhyāyartvigādibhiḥ|| 16
अर्थ
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—आशुतोष शंकरसे इस प्रकार अपना अपराध क्षमा कराकर दक्षने ब्रह्माजीके कहनेपर उपाध्याय, ऋत्विज् आदिकी सहायतासे यज्ञकार्य आरम्भ किया॥ १६॥✎ 362
क्षमाप्यैवं स मीढ्वांसं ब्रह्मणा चानुमन्त्रितः।
कर्म सन्तानयामास सोपाध्यायर्त्विगादिभिः॥ १६
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—आशुतोष शंकरसे इस प्रकार अपना अपराध क्षमा कराकर दक्षने ब्रह्माजीके कहनेपर उपाध्याय, ऋत्विज् आदिकी सहायतासे यज्ञकार्य आरम्भ किया॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.7.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 435) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/7/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)