देवताओंसे इस प्रकार कहकर ब्रह्माजी उनको, प्रजापतियोंको और पितरोंको साथ ले अपने लोकसे पर्वतश्रेष्ठ कैलासको गये, जो भगवान् शंकरका प्रिय धाम है॥ ८॥
स इत्थमादिश्य सुरानजस्तैः
समन्वितः पितृभिः सप्रजेशैः।
ययौ स्वधिष्ण्यान्निलयं पुरद्विषः
कैलासमद्रिप्रवरं प्रियं प्रभोः॥ ८
देवताओंसे इस प्रकार कहकर ब्रह्माजी उनको, प्रजापतियोंको और पितरोंको साथ ले अपने लोकसे पर्वतश्रेष्ठ कैलासको गये, जो भगवान् शंकरका प्रिय धाम है॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.6.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 428) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/6/8/