श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.5.1

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

अथ पञ्चमोऽध्यायः

वीरभद्रकृत दक्षयज्ञविध्वंस और दक्षवध

मैत्रेय उवाच

भवो भवान्या निधनं प्रजापते-

रसत्कृताया अवगम्य नारदात्।

स्वपार्षदसैन्यं च तदध्वरर्भुभि-

र्विद्रावितं क्रोधमपारमादधे॥ १

bhavo bhavānyā nidhanaṃ prajāpate-

rasatkṛtāyā avagamya nāradāt|

svapārṣadasainyaṃ ca tadadhvararbhubhi-

rvidrāvitaṃ krodhamapāramādadhe|| 1

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—महादेवजीने जब देवर्षि नारदके मुखसे सुना कि अपने पिता दक्षसे अपमानित होनेके कारण देवी सतीने प्राण त्याग दिये हैं और उसकी यज्ञवेदीसे प्रकट हुए ऋभुओंने उनके पार्षदोंकी सेनाको मारकर भगा दिया है, तब उन्हें बड़ा ही क्रोध हुआ॥ १॥✎ 1317

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1317 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नर-मुण्डोंकी → नरमुण्डोंकी

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