श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! भगवान् नारदने प्रचेताओंको इस उपदेशके साथ-साथ और भी बहुत-सी भगवत्सम्बन्धी बातें सुनायीं। इसके पश्चात् वे ब्रह्मलोकको चले गये॥ २३॥
इति प्रचेतसो राजन्नन्याश्च भगवत्कथाः।
श्रावयित्वा ब्रह्मलोकं ययौ स्वायम्भुवो मुनिः॥ २३
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! भगवान् नारदने प्रचेताओंको इस उपदेशके साथ-साथ और भी बहुत-सी भगवत्सम्बन्धी बातें सुनायीं। इसके पश्चात् वे ब्रह्मलोकको चले गये॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.31.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 573) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/31/23/