श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.31.23

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 31 · अथैकत्रिंशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

इति प्रचेतसो राजन्‍नन्याश्‍च भगवत्कथाः।

श्रावयित्वा ब्रह्मलोकं ययौ स्वायम्भुवो मुनिः॥ २३

iti pracetaso rājannanyāśca bhagavatkathāḥ|

śrāvayitvā brahmalokaṃ yayau svāyambhuvo muniḥ|| 23

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! भगवान् नारदने प्रचेताओंको इस उपदेशके साथ-साथ और भी बहुत-सी भगवत्सम्बन्धी बातें सुनायीं। इसके पश्चात् वे ब्रह्मलोकको चले गये॥ २३॥

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