इस समय अपने आत्मीयोंसे मिलनेके लिये मेरी बहिनें भी अपने-अपने पतियोंके सहित वहाँ अवश्य आयेंगी। मैं भी चाहती हूँ कि आपके साथ वहाँ जाकर माता-पिताके दिये हुए गहने, कपड़े आदि उपहार स्वीकार करूँ॥ ९॥
तस्मिन् भगिन्यो मम भर्तृभिः स्वकै-
र्ध्रुवं गमिष्यन्ति सुहृद्दिदृक्षवः।
अहं च तस्मिन् भवताभिकामये
सहोपनीतं परिबर्हमर्हितुम्॥ ९
इस समय अपने आत्मीयोंसे मिलनेके लिये मेरी बहिनें भी अपने-अपने पतियोंके सहित वहाँ अवश्य आयेंगी। मैं भी चाहती हूँ कि आपके साथ वहाँ जाकर माता-पिताके दिये हुए गहने, कपड़े आदि उपहार स्वीकार करूँ॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.3.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 416) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/3/9/