इसी समय ब्रह्माजीने दक्षको समस्त प्रजापतियोंका अधिपति बना दिया। इससे उसका गर्व और भी बढ़ गया॥ २॥
यदाभिषिक्तो दक्षस्तु ब्रह्मणा परमेष्ठिना।
प्रजापतीनां सर्वेषामाधिपत्ये स्मयोऽभवत्॥ २
इसी समय ब्रह्माजीने दक्षको समस्त प्रजापतियोंका अधिपति बना दिया। इससे उसका गर्व और भी बढ़ गया॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.3.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 415) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/3/2/