श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.3.2

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

यदाभिषिक्तो दक्षस्तु ब्रह्मणा परमेष्ठिना।

प्रजापतीनां सर्वेषामाधिपत्ये स्मयोऽभवत्॥ २

yadābhiṣikto dakṣastu brahmaṇā parameṣṭhinā|

prajāpatīnāṃ sarveṣāmādhipatye smayo'bhavat|| 2

अर्थ

इसी समय ब्रह्माजीने दक्षको समस्त प्रजापतियोंका अधिपति बना दिया। इससे उसका गर्व और भी बढ़ गया॥ २॥

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