सतीका पिताके यहाँ यज्ञोत्सवमें जानेके लिये आग्रह करना
मैत्रेय उवाच
सदा विद्विषतोरेवं कालो वै ध्रियमाणयोः।
जामातुः श्वशुरस्यापि सुमहानतिचक्रमे॥ १
sadā vidviṣatorevaṃ kālo vai dhriyamāṇayoḥ|
jāmātuḥ śvaśurasyāpi sumahānaticakrame|| 1
अर्थ
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! इस प्रकार उन ससुर और दामादको आपसमें वैर-विरोध रखते हुए बहुत अधिक समय निकल गया॥ १॥
सदा विद्विषतोरेवं कालो वै ध्रियमाणयोः।
जामातुः श्वशुरस्यापि सुमहानतिचक्रमे॥ १
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! इस प्रकार उन ससुर और दामादको आपसमें वैर-विरोध रखते हुए बहुत अधिक समय निकल गया॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.3.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 415) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/3/1/