राजा प्राचीनबर्हिने कहा—भगवन्! मेरी समझमें आपके वचनोंका अभिप्राय पूरा-पूरा नहीं आ रहा है। विवेकी पुरुष ही इनका तात्पर्य समझ सकते हैं, हम कर्ममोहित जीव नहीं॥ १॥
भगवंस्ते वचोऽस्माभिर्न सम्यगवगम्यते।
कवयस्तद्विजानन्ति न वयं कर्ममोहिताः॥ १
राजा प्राचीनबर्हिने कहा—भगवन्! मेरी समझमें आपके वचनोंका अभिप्राय पूरा-पूरा नहीं आ रहा है। विवेकी पुरुष ही इनका तात्पर्य समझ सकते हैं, हम कर्ममोहित जीव नहीं॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.29.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 553) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/29/1/