श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.27.26

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

अथो भजस्व मां भद्र भजन्तीं मे दयां कुरु।

एतावान् पौरुषो धर्मो यदार्ताननुकम्पते॥ २६

atho bhajasva māṃ bhadra bhajantīṃ me dayāṃ kuru|

etāvān pauruṣo dharmo yadārtānanukampate|| 26

अर्थ

भद्र! इस समय मैं आपकी सेवामें उपस्थित हुई हूँ, आप मुझे स्वीकार करके अनुगृहीत कीजिये। पुरुषका सबसे बड़ा धर्म दीनोंपर दया करना ही है’॥ २६॥

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