saṅkalpastvayi bhūtānāṃ kṛtaḥ kila na riṣyati|| 24
अर्थ
और कहा, ‘वीरवर! आप यवनोंमें श्रेष्ठ हैं, मैं आपसे प्रेम करती हूँ और पति बनाना चाहती हूँ। आपके प्रति किया हुआ जीवोंका संकल्प कभी विफल नहीं होता॥ २४॥
ऋषभं यवनानां त्वां वृणे वीरेप्सितं पतिम्।
सङ्कल्पस्त्वयि भूतानां कृतः किल न रिष्यति॥ २४
और कहा, ‘वीरवर! आप यवनोंमें श्रेष्ठ हैं, मैं आपसे प्रेम करती हूँ और पति बनाना चाहती हूँ। आपके प्रति किया हुआ जीवोंका संकल्प कभी विफल नहीं होता॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.27.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 545) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/27/24/