श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.27.17

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

क्षीयमाणे स्वसम्बन्धे एकस्मिन् बहुभिर्युधा।

चिन्तां परां जगामार्तः सराष्ट्रपुरबान्धवः॥ १७

kṣīyamāṇe svasambandhe ekasmin bahubhiryudhā|

cintāṃ parāṃ jagāmārtaḥ sarāṣṭrapurabāndhavaḥ|| 17

अर्थ

बहुत-से वीरोंके साथ अकेले ही युद्ध करनेके कारण अपने एकमात्र सम्बन्धी प्रजागरको बलहीन हुआ देख राजा पुरंजनको अपने राष्ट्र और नगरमें रहनेवाले अन्य बान्धवोंके सहित बड़ी चिन्ता हुई॥ १७॥

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