श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.27.13

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

चण्डवेग इति ख्यातो गन्धर्वाधिपतिर्नृप।

गन्धर्वास्तस्य बलिनः षष्ट्युत्तरशतत्रयम्॥ १३

caṇḍavega iti khyāto gandharvādhipatirnṛpa|

gandharvāstasya balinaḥ ṣaṣṭyuttaraśatatrayam|| 13

अर्थ

राजन्! चण्डवेग नामका एक गन्धर्वराज है। उसके अधीन तीन सौ साठ महाबलवान् गन्धर्व रहते हैं॥ १३॥

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