श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.26.12

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

आत्मानमर्हयांचक्रे धूपालेपस्रगादिभिः।

साध्वलङ्कृतसर्वांगो महिष्यामादधे मनः॥ १२

ātmānamarhayāṃcakre dhūpālepasragādibhiḥ|

sādhvalaṅkṛtasarvāṃgo mahiṣyāmādadhe manaḥ|| 12

अर्थ

फिर गन्ध, चन्दन और माला आदिसे सुसज्जित हो सब अंगोंमें सुन्दर-सुन्दर आभूषण पहने। तब उसे अपनी प्रियाकी याद आयी॥ १२॥

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