अच्छा, इस विषयमें मैं तुम्हें एक प्राचीन उपाख्यान सुनाता हूँ। वह राजा पुरंजनका चरित्र है, उसे तुम मुझसे सावधान होकर सुनो॥ ९॥
अत्र ते कथयिष्येऽमुमितिहासं पुरातनम्।
पुरंजनस्य चरितं निबोध गदतो मम॥ ९
अच्छा, इस विषयमें मैं तुम्हें एक प्राचीन उपाख्यान सुनाता हूँ। वह राजा पुरंजनका चरित्र है, उसे तुम मुझसे सावधान होकर सुनो॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 534) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/25/9/